किस्सों के किस्से…
Monday, March 12, 2007
आप ही बताइए!
इस ब्लाग पर लिखने से पहले मुझे उन बातों के बारे मे सोचना पढ़ता है जिनके बारे मे मै लिख सकता हुं पर नही लिखनी है। और फ़िर मै इसे अब भी इसकी रुह नही दे पाया। जो अब तक लिखा है, वो तो बस फ़ूल हैं, मंत्र हैं, विनती है अपने आप से कि इसे एक साकार रुप दे सकूँ। आप अगर मुझे जानते हैं (या फ़िर मेरे किस्सेकारी के ज़रिए ही मुखातिब हुए हों) तो मुझे बताइए कि मै कैसे इन पन्नों कि रुह अदाइगी कर सकूँ ?
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